Sunday, June 14, 2020

Sushant Singh Rajput

Sushant singh rajput
Sushant Singh Rajput

पता है, आपको बिल्कुल भी पता नही चलेगा कि कुछ लोग अंदर से कितने टूटे हुए होते है। अगर वो आपको आ कर बोलेगे न कि "मैं अंदर से टूटा हुआ हूं" तो आप यकीन नहीं करेंगे। उनका स्वभाव ही कुछ ऐसा होता है की सामने वाला यकीन ही नही कर सकता, कि इतने हँसमुख इंसान को भी कोई तकलीफ होगी। कोई बात उसे अंदर से दीमक की तरह खाई जा रही होगी। आपको हर समस्या में समझाने वाले इंसान को कभी कोई समझने वाला नही मिलता होगा। वो शायद आपको बोलते भी होंगे कि "यार मुझे ये परेशानी है", "मैं इसलिए परेशान हूं" आप हंस कर टाल देते होंगे कि सबको परेशानी से निकालने वाले को आखिर किस बात की परेशानी होगी? या आप सच भी मानते होंगे तो ये सोच कर कुछ नही करते होंगे कि "ये तो इतना समझदार है खुद को संभाल लेगा" लेकिन सच्चाई ये है कि उन्हें भी किसी के साथ की, किसी से खुल कर बात की जरूरत होती है।

कहते है जाने वाले को हम रोक नही सकते लेकिन इस परिस्थिति में हम जाने वाले को बिल्कुल रोक सकते है। बस आप अपने जानकारों से रोजाना बात करिए। उन्हें समझने की कोशिश करिए उनसे खुल कर पूछिए की "कोई तकलीफ तो नही?" फॉर्मेलिटी के लिए नही सच में दिल से पूछिए। अगर वो कोई बात शेयर करते है तो आराम से उसे समझे और फिर उसे समझाइए। आप नही समझा सकते तो किसी और को बोलिए लेकिन चुप बिल्कुल भी मत बैठिए। आपका एक चुप किसी को जिंदगी भर के लिए चुप करवा सकता है। सबसे जरूरी की आप कुछ भी करने और बोलने से पहले कई बार सोचे कि आपका एक कदम किसी के दिल को ठेस तो नही पहुचा देगा। आपके लिए वो बहुत छोटी बात होगी लेकिन सामने वाले के लिए वो बहुत बड़ी बात हो जाती है। शायद इतनी बड़ी की हमे फिर से वो देखने को मिल जाए जो आज मिला है। मैं हमेशा कहता हूं अपने आप को सामने वाले कि जगह रख कर देखो की उसने ऐसा क्यों किया या बोला अगर मैं उसकी जगह होता तो क्या करता या बोलता। जिस दिन आप खुद को सामने वाले कि जगह रखना सीख जाएंगे ना उस दिन आपकी आधी समस्या खुद हल हो जाएगी।

जरा सोच कर देखिए कि कितने अजीब हो गए हैं हम सब। हमारे बीच एक व्यक्ति मुश्किल में होता है। अंदर से बुरी तरह से टूट रहा होता है। ज़िंदगी से हार रहा होता है। खुद से निराश हो रहा होता है। मौत के करीब जा रहा होता है और हमारी संवेदना तब जागती है जब वो हमेशा के लिए हमें छोड़ कर चले जाता है। काश! मुश्किल में घिरे सुशांत सिंह जी को उनका कोई साथी हिम्मत देकर बचा पाता।

बिहार के पटना जैसे छोटे शहर से मुम्बई तक का सफर हर कोई पूरा नही कर पता। 2003 में DCE एंट्रेंस एग्जाम में AIR 7 लाना कितनी बड़ी बात है आप इससे समझ पाएंगे कि नॉन मेडिकल स्टूडेंट का इकलौता यही सपना होता है कि 10,000 रैंक भी आ जाए तो जिंदगी बन जाएगी। नेशन ओलिंपियाड फिजिक्स में टॉप करना, ये तो स्टूडेंट के सपने से भी बहुत दूर होता है। स्टूडेंट एक एग्जाम क्लियर करने की चाह रखते है इन्होंने 1 नही 2 नही पूरे 11 इंजीनियरिंग के एग्जाम क्लियर किए। अब आप सोच सकते है एक्टर के साथ साथ ये कितने अच्छे अच्छे स्टूडेंट भी थे।

आपके बहुत से डायलाग आज भी बहुतो को प्रेरणा देते है और देते रहेंगे!

मैं जब भी " M S Dhoni - The Untold Story " देखूंगा तो आपको अपने सामने जिंदा पाउगा। कुछ लोगो के काम इतने अच्छे होते है कि वो अमर रहा जाते है....

💐💐🌼🌼🌼🌼🌼💐💐
🙏🙏भावपूर्ण श्रदांजलि🙏🙏


We will miss you SUSHANT SINGH RAJPUT Sir


Sushant Singh Rajput rose to become a prominent actor due to his talent. A young actor, who excelled in his roles, gone too soon.. May the departed soul Rest in peace and God give strength to his family, friends & fans to bear this loss.

Note: We are not saying and supporting that Sushant Singh Rajput committed suicide, this article is based on initial report of June 14, 2021 from Media. Main purpose of this article is to increase awareness in our society.

धन्यवाद
Thank you

नितीश कुमार
Nitish Kumar

Sunday, May 31, 2020

कोरोना वायरस से कैसे बचें?


Covid 19
Covid-19

कल (1 जून 2020) से लॉकडॉन-5 (अनलॉक-1) शुरू हो रहा है। जिसमें लग भग सब कुछ खुल रहा है। इसका मतलब ये नही की अब आप घूमना फिरना शुरू कर दो। ये सब कुछ बस इसलिए खोला जा रहा है कि लोगो की आर्थिक स्थिति ठीक हो पाए। याद रहे कोरोना खत्म नही हुआ है, ये अब और तेजी से बढ़ रहा है। तो बस पैसे कमाने, काम करने और जरूरी चीज़ों के लिए ही घर से बाहर निकले। इसे मजाक में या हल्के में ना ले। आप अपनी जिंदगी अपने परिवार की जिन्दगी के लिए और देश के लिए घर पे ही रहे। वेवजह बिल्कुल भी घर से ना निकले। अगर कुछ महीने आप घर पर बैठ जाएंगे तो फिर से आप जिंदगी भर घूम सकते हैं मौज-मस्ती कर सकते हैं।

युवाओं के लिए एक जरुरी संदेश।

आपके पेरेंट्स अपनी जान जोखिम में डाल कर आप के लिए पैसे कमाने घर
से बाहर निकलेंगे तो आप वेवजह घर स बाहर निकल कर खुद की उनकी जान जोखिम में मत डाल देना।
जिन यार दोस्तो से आप मिलने जाओगे न, अगर भगवान ना करें आपको कोरोना हो गया ना तो उसके बाद वही यार दोस्त आपको नजर भी नही आएंगे।

कोरोना वायरस (कोविड - 19) से कैसे बचें?


जब भी आप जरूरी कामों के लिए घर बाहर जाए तो इन बातों को हमेशा ख्याल रखे और इसका पालन करें। ये आपको कोरोना वायरस (Covid-19) से बहुत हद तक कोरोना वायरस से बचा सकता है।

S - Social Distancing (समाजिक दूरी)

M - Mask (मास्क)

S - Sanitizer / Soap (सैनिटाइजर / साबुन)


Social Distancing (समाजिक दूरी)

जब भी आप घर से बाहर जाए तो सबसे जरूरी है कि सामाजिक दूरी का हर पल हर जगह हर क्षण खयाल रखें। हमेशा लोगो से कम से कम 6 फ़ीट (2 गज़) की दूरी बना कर रखे। किसी भी जगह किसी भी हालत में ये 2 गज की दूरी को कम नही होने देना है। किसी भी ऐसे व्यक्ति के सम्पर्क में ना आए जिन्हें कोरोना के लक्षण (जैसे बुखार और खांसी) है। 

Mask (मास्क)

मास्क को अब अपने शरीर का ही एक हिस्सा मानना है। हमेशा मास्क पहन कर रहे। बार बार मास्क को छुए नही। मास्क के रूप में आप खुद का कपड़े (3 लेयर वाला) वाला मास्क भी प्रयोग कर सकते है। कपड़ा या रुमाल को मास्क की जगह प्रयोग करते वक़्त आप इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखे कि जो हिस्सा आपने पहली बार कपड़े/रुमाल का बाहर की तरफ रखा था उसे हर बार बाहर की तरफ ही रखे। दूसरों के मास्क का प्रयोग ना करें। मास्क को रोजाना धो ले या बदल ले।

Sanitizer / Soap (सेनिटाइजर / साबुन)

दिन में बार बार सैनिटाइजर या साबुन से हाथ धोते रहे है। सेनिटाइजर का प्रयोग करते वक़्त आप सेनिटाइजर हाथ मे लेने के बाद सेनिटाइजर की बोतल को रख दे उसके बाद ही हाथ मे सेनिटाइजर लगाए, याद रहे सैनिटाइजर लगाने के बाद सैनिटाइजर की बोतल को आप न छुए या सेनिटाइजर की बोतल पर सेनिटाइजर लगा कर उसे भी डिसइन्फेक्ट(disinfect) करे। साबुन से बार बार 20 सेकंड तक हाथ धोए और हाथ धोते वक़्त अपने नल को भी साफ कर दे ताकि आपके नल पर कीटाणु ना रह जाए।

पानी की बोतल

घर से निकले से पहले अपने साथ अपनी पानी की बोतल में पानी लेना ना भूले। बहार कहि से भी पानी भरने से पहले देख ले वहां साफ सफाई होनी चाहिए। नल से पानी भरने से पहले नल को अच्छी तरह से धो लें। अपनी बोतल से किसी को पानी ना पीने दे, और ना ही दूसरों की बोतल से पानी पीयें।

चीज़ों को छूने से बचे

किसी भी अनावश्यक चीज़ों को जैसे बटन, दरवाजे, रेलिंग को न छुए। बटन और दरवाज़ों का प्रयोग करने के लिए अपने हाथ की कोनी का प्रयोग करे। 

मुह को ना छुए

किसी भी हालत में हमेशा याद रहे कि आपको अपने मुह के किसी भी हिस्से को कभी भी नही छूना है। अगर जरूरत पड़ती भी है तो छूने से पहले हाथ को साबुन या सेनिटाइजर से धो लें उसके बाद ही मुह को छुए।

सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें तो

यात्रा करने से पहले अपने हाथों को सैनिटाइज करें सुनिश्चित करें कि वाहन के ड्राइवर और स्टाफ सहित सभी यात्री मास्क पहनें हुए है। ध्यान दे कि शारीरिक दूरी बनी रहे (एक व्यक्ति पहर लाइन की हर ओर जिग-जैग तरीके में रहें) एसी को बंद रखें और ताजी हवा के लिए खिड़कियां खोल दें।

हमेशा यह याद रखें थूकें नहीं

थूक लगा कर पेज न पलटें, न नोट आदि गिनें। किसी के साथ भी खाना, पानी और बाकी समान शेयर ना करे। भीड़भाड़ वाले इलाके में जाने से बचें। हाथ न मिलाएं, नमस्ते करें। खांसते या छींकते वक्त कोहनी या टिश्यू पेपर का इस्तेमाल करें।

घर पर आने के बाद

घर में चप्पल या जूते पहन कर ना जाए। घर में घुसने से पहले अपने चप्पल जूतों को खोल ले और घर के बाहर ही रख दे, नही तो उसे घर के किसी ऐसी जगह रख दे जहां कोई आता जाता ना हो। अपने समान को डिसइन्फेक्ट करे और किसी अच्छी जगह रख दें। घर में आते ही सबसे पहले अपने हाथ पैर अच्छे से धो लें और नाहा लें। उसके बाद बाथरूम की बाकी चीज़ों को धो ले जैसे नल, दरवाजे का हैंडल। दोबारा से वही कपड़े ना पहने उन कपड़ो को अलग से धो कर अच्छे से धूप में सूखने दें।

कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए:

  • ऊपर बताए गए SMS का ध्यान रहे और दूसरों को भी बताए
  • बार-बार हाथ धोएं। हाथ धोने के लिए, साबुन और पानी या एल्कोहल वाला हैंड रब इस्तेमाल करें।
  • अगर कोई खांस या छींक रहा है, तो उससे उचित दूरी बनाए रखें।
  • अपनी आंखें, नाक या मुंह को न छुएं।
  • खांसने या छींकने पर अपनी नाक और मुंह को कोहनी या टिश्यू पेपर से ढक लें।
  • अगर आप ठीक नहीं महसूस कर रहे हैं, तो घर पर रहें।
  • अगर आपको बुखार, खांसी है, और सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर के पास जाएं. पहले ही कॉल कर लें।
  • स्थानीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के निर्देश मानें।


Wednesday, May 27, 2020

भूतिया स्टेशन (Part 1)

Horror Story
भूतिया स्टेशन
डर..... ये एक ऐसा शब्द है जिसे पढ़ते ही मन विचलित हो जाता है। पता नही क्यों लेकिन हमारे मन में बचपन से ही डर बुरी तरीके से बैठा दिया जाता है। 'सो जाओ नही तो भूत आ जायेगा', 'ये खा लो नही तो भूत तुम्हें खा जाएगा', 'जो रोता है भूत उसके पास आ जाता है', 'बाहर अकेले मत जाना भूत घूमता है' और भी बहुत कुछ। जिस उम्र में बच्चों को अपना नाम भी नही पता होता है, खाना क्या तीज है वो तक नही पता होता है, और हम उसे ये सब जरूरी बातें समझाने की जगह भूत के बारे में बताते है। मतलब उन्हें छोटी से छोटी चीज़े कुछ भी नही पता होती, लेकिन भूत के बारे में पता होता है कि भूत एक ऐसी चीज़ है जो बहुत बहुत बहुत ज्यादा खतरनाक है। खुशी क्या होती है दुख क्या होता है ये भी उन्हें नही पता होता लेकिन डर क्या होता है वो 6 महीने के बच्चों को भी अच्छे से पता होता है। जिस उम्र में बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप में मजबूत बनाना चाहिए उस उम्र में रोजाना भूत, आत्मा, चुड़ैल का नाम लेकर, डरावनी कहानी सुना सुना कर हम बच्चो को डरपोक बना देते है। उनके दिल दिमाग में पूरी तरह से डर को बैठा बैठा दिया जाता है।

तो आज की कहानी भी एक डर पे ही आधारित है।

पिछली बार की कहानी (भूतिया मकान) पढ़ने के बाद मेरे एक दोस्त ने अपनी कहानी सुनाई की कैसे डर किसी पर हावी हो जाता है और ये डर उस व्यक्ति से कुछ भी करवा सकता है।

(अब कहानी उसके शब्दों में)

WARNING: Reader's discretion is advised, should not be read by anyone under the age of 12.

मेरी बाहरवीं की परीक्षा होने के बाद मैं कुछ दिनों के लिए गांव चला गया। गाँव में दादा-दादी रहते है। उनकी मदद के लिए दिन में एक नौकर रहता हैं लेकिन हम उन्हें चाचा जी कहते है। फ़ोन पर दादा जी ने बताया था कि हमारे गांव की छोटी रेलवे लाइन अब बड़ी रेलवे लाइन बनने जा रही है इसलिए रेल सेवा बंद कर दी गयी है। इसलिए मैं बस से गांव गया। अब बड़ा हो गया था इसलिए पहली बार अकेले कहि गया था। बस से गांव के नजदीक के स्टैंड पर उतरने के बाद मैंने गांव के रेलवे स्टेशन वाला रास्ता चुना, ये देखने के लिए की काम कैसा चल रहा है। ये क्या! यहां तो कुछ भी काम नही हो रहा, पुराना रेलवे स्टेशन खंडर बन चुका है। पूरा रास्ता शमशान की तरह वीरान पड़ा है। बाद में मैंने दादा जी से पूछा तो उन्होंने बताया कि वहां मजदूरों ने भूत देखा था तब से कोई वहां काम नही करता तुम वहां से क्यों आए? उस रास्ते से कोई आता जाता नही वहां बहुत लोगो ने भूत देखा है! भगवान का शुक्र है कि तुम सही सलामत आ गए अब आगे से उधर मत जाना। ये लाइन सुनते ही मैं अंदर से पूरा कांप गया। पसीने छूट गए, रोंगटे खड़े हो गए कि अगर वहां मुझे भूत मिल जाता तो! बचपन से ही भूत से दुनिया ने इतना डरा रखा था तो ये डर तो लगना ही था। अब पता नहीं क्यों लेकिन मुझे अब रात को हर चीज़ों से डर लगने लगा। ऐसा लगता कि घर के शीशे से मुझे कोई देख रहा है। कानों को छूती हुई हवाएं कुछ बोल रही है। घर की खिड़कियों से कोई अंदर आ रहा है। इन सब बातों पर मेरा ध्यान ना जाए तो मैं फ़ोन चलाने लगता तो अचानक लगता कि कोई मेरे पीछे से मुझे कोई देख रहा है और आचानक से कंधे पर हाथ रखेगा। जैसे ही मैं पलंग से उतरूंगा तो कोई मुझे पलंग के नीचे से खींच लेगा। मेरे घर की छत से वो रेलवे स्टेशन नजर आता है। जब भी मैं अपने छत पर जाता हूं और उस स्टेशन को देखता हूं तो उसे ऐसा लगता है जैसे कोई मुझे वहां से बुला रही है की 'तुम आओ मैं तुमसे मिलना चाहती हूं'। मैंने सोचा कि दादा-दादी को ये बात बता दु लेकिन दिमाग में आया कि वो क्या सोचेंगे? शायद यही मैंने सबसे बड़ी गलती कर दी। एक रात मैं सो रहा था और अचानक मेरे सपने में वही टूटा फूटा रेलवे स्टेशन नजर आता है। वो देखते ही मैं इतना सहम जाता हूं कि मेरी नींद खुल जाती है। पसीने से लत पत जब मैंने घड़ी देखी तो रात के 2 बज रहे थे। मैं पूरा डर चुका हूं, घड़ी की टिक-टॉक टिक-टॉक और डरा रही है। कोई मुझे आवाज दे रहा है। मैं जोर जोर से भागने लगता हूँ। दादा-दादी के कमरे की तरफ नही, उसी रेलवे स्टेशन की तरफ, हां! उसी स्टेशन की तरफ, पता नही क्यों लेकिन मैं भागा जा रहा हूँ। मुझे खुद कुछ समझ नही आ रहा, ना चाहते हुए भी मेरे कदम आगे बढ़ रहे है। जैसे लग रहा है कोई सफेद चीज़ मेरे पीछे पीछे भाग रही है। मेरे हर कदम के साथ वो भी अपने कदम बढ़ा रही है। अब पायल की आवाज मेरे कानों को सुनाई दे रही है। जैसे ही पीछे मुड़ता हूं आवाज गयाब हो जाती है। जो चाँद रोज प्यारा लगता था वो भी आज डरावना लग रहा है। मैं भाग रहा हूं, पायल की आवाज तेज हो रही है। मैं चिल्ला रहा हूं, पायल की आवाज और तेज हो रही है। जैसे जैसे मैं भाग रहा हूं आवाज बढ़ती ही जा रही है। अचानक मैं पीछे मुड़ा! मेरे पीछे कोई नजर नही आ रहा मेरी नजर मेरे घर की तरफ गयी वहां छत स कोई मुझे टाटा कर रहा है। मैं अब फिर स्टेशन की और भागने लगा। कदम लडख़ड़ा रहे है, सांसे अटक रही है, पसीने से पूरा शरीर भीग चुका है। पायल की आवाज अभी भी मेरा पीछा कर रही है। मैं जोर जोर से चिल्ला रहा हूं मगर कोई भी नजर नही आ रहा गले से आवाज भी नही निकल पा रही फिर भी मैं चिल्ला रहा हूं। स्टेशन पर अब मैं पहुच गया। रात अब अपने चरम पर पहुच चुकी है। मुझे ऐसा लग रहा है यहां पर कोई परछाई मुझे देख रही है। अचानक परछाई ने अपनी जगह बदल ली। मैं जल्दी जल्दी अपनी गर्दन घुमा रहा हूं, परछाई फिर मुझे किसी ओर तरफ से देखने लग रही है। मुझे कुछ समझ नही आ रहा क्या हो रहा है। डर पूरी तरह से मुझ पर हावी हो गया है। एक छोटी से आहट से भी सांसे रुक रही है। ऐसा लग रहा है कि स्टेशन की छत पर मुझे कोई बुला रहा है। स्टेशन के छत की सीढ़ियों की और अब मै भाग रहा हूं। अचानक से मैं गिर गया। खड़ा नही हुआ जा रहा। ऐसा लग रहा है जैसे कोई मुझे दबाने की कोशिश कर रहा है। जैसे तैसे मैं उठ गया। फिर चिल्लाते हुए गिरते उठते मैं स्टेशन की छत पर पहुच गया। आंखों में डर, माथे पर पसीना। चारो तरफ बस अंधेरा अंधेरा और अंधेरा। ये क्या! छत पर कोई खड़ा है। डरावना चाँद, पायल की आवाज और ये डरावनी रात, ऐसा लग रहा है जैसे ये पहले भी कभी हुआ है। अब वो छत स कूदने की कोशिश कर रहा है। मैं कांपते कांपते उसकी और बढ़ रहा हूं। ठंडी हवा छू कर निकल रही है तो लग रहा कोई पीछे से आ कर कोई मेरा गला दबा देगा। उसके पास अब मै जैसे तैसे डरते डरते पहुच गया। अब वो कूदने की कोशिश कर रहा है, मैं उसे बचाने की कोशिश कर रहा हूँ। मुझे फिर कुछ समझ नही आ रहा है मैं ऐसा क्यों कर रहा हूँ। लग रहा है जैसे मेरा शरीर अब मेरा नही रहा अब ये किसी और का हो गया है। कहते है रात को आत्माओ की  शक्ति दुगनी हो जाती है और वो आम लोगो की बीच में आ जाती है। जिन्हें पता चल जाये कि आत्मा आस पास है उन पर वो हावी हो जाती है। शायद उस डरावनी रात भी मेरे साथ यही हुआ था। वो कूद गया! उसे बचाने के लिए अब मैं भी कूद गया....! ये क्या! मेरे कूदते ही वो नजर आना बंद हो गया! पायल की आवाज अब जोर-जोर से डरावनी हँसी में बदल गयीं। ऐसे लग रहा है जैसे वो हँसी मुझे कहा रही है कि मैंने अपना काम कर लिया। मैं जमीन पर गिरता हु। आंखे बंद हो रही है और आंखें बंद हो गयी। अब अंधेरा, अंधेरा, अंधेरा और बस अंधेरा.....!

To be continued....


Nitish Kumar
नितीश कुमार

Disclaimer:


From this story, I am not promoting any type of Superstitions. The purpose of this story is only for entertainment purpose nothing else.

If someone's story mirrors this, it is just a coincidence.

Any action you take upon the information or advertisement you find on this website, is strictly at your own risk.

For any Suggestions/Complaint Mail to Nitish Kumar on nitish212002@gmail.com

For more such type of horror stories in hindi, poems, love poems, motivational poems, poems on social issues (all poems in hindi), shayari, love shayari, Do regular visit to this blog.
nitishkealfaaz.blogspot.com

Wednesday, May 6, 2020

Love in Train

Love at first sight
Love at first sight

In a train, during my journey,
I saw a girl, sweet as honey.
I can't able to explain her beautiful smile,
I have never seen such a unique hairstyle.
That moment I have only one aim,
How I will ask her name?
Suddenly! That moment one miracle happen,
She questioned me " Can I ask you a Question"
I still have to pinch myself,
How it happened itself?
Now, I'm dreaming my whole life with her,
There is no one in my dream except her.
Suddenly! A clap broke that dream,
"Are you listening me?" She scream.
I nervously nodded my head,
"Now, I don't need any answer from you" she said.
All dreams that moment slipped like a sand,
I understand there is no one to hold my hand.

Nitish Kumar

Sunday, April 5, 2020

JL DAV की यादें


JL DAV की यादें


Jhabban Lal DAV Public School
Jhabban Lal DAV Public School

स्कूल नही जीवन का अटूट हिस्सा था JL DAV
कहानी नही जीवन का प्यारा क़िस्सा था JL DAV

टीचर्स के अनोखे नाम वाला प्यार था JL DAV
हमारे बचपन का पहला यार था JL DAV

जान बुझ कर देरी से स्कूल जाने का बहाना था JL DAV
फिर गार्ड और पीटी से बेवजह बहस करने का ठिकाना था JL DAV

असेंबली में ना जाकर क्लास में ही बैठना था JL DAV
फिर सविता मैम के आते ही छुप जाना था JL DAV

स्कूल शुरू होते ही पहला काम अर्रेंजमेंट देखना था JL DAV
नोटिस बोर्ड से पहले हंसा आंटी से अर्रेंजमेंट देखना था JL DAV

मैम के जाते ही क्लास के बाहर घूमने निकल जाना था JL DAV
कम्बोज मैम का नाम सुन कर ही वापिस क्लास में घुस जाना था JL DAV

नेहा मालिक मैम का अचानक से दिया टोन सुनना था JL DAV
और उनके सामने रोजाना खुद को मौन खड़ा करना  था JL DAV

नीनू मैम को अपनी सारी बाते बताना था JL DAV
उनके रूम में जाने का इंतज़ार था JL DAV

शिखा मैम के प्यारे फेस एक्सप्रेशन देखना था JL DAV
उनके सामने हमारा इंग्लिश बोलने का ओबसेशन दिखाना था JL DAV

विदुषी मैम के ट्रिक से फार्मूला याद करना था JL DAV
नीना भोला मैम के पीरियड में मैथ पढ़ना और लॉन्च करना था JL DAV

केमिस्ट्री लैब में बिना लैब कोट और बिना पढ़े जाना था JL DAV
फिर थोड़ी देर बाद संजय सर् का गुस्सा देखना था JL DAV

फिजिक्स लैब में फॉर्मेलिटी का प्रैक्टिकल करते रहना था JL DAV
बीच बीच मे कुलबीर सर् से मजेदार गप्पे मारना था JL DAV

ई जी रूम में गेम खेलना और मजे करना था JL DAV
पवन सर् से बेमतलब की सारी बाते करना था JL DAV

श्रुति मैम से पढ़ना कम बहस ज्यादा करना था JL DAV
सीमा सिंह मैम के क्लास में सबका मौजूद रहना था JL DAV

संगीता मैम के नोट्स को अंडरलाइन करना था JL DAV
आकांशा मैम के लम्बे नोट्स को याद करना था JL DAV

मंजू शर्मा मैम को देखते ही राधे राधे करना था JL DAV
गीता कपूर मैम से किलो पॉट होउर सुनना था JL DAV

सरिता मालिक मैम से कभी भी चाटा खा जाना था JL DAV
पंकज सर् के अजीब से पनिशमेंट को सहन करना था JL DAV

अनुपमा मैम का कभी गुस्सा कभी प्यार देखना था JL DAV
आरती जैन मैम का माँ वाला प्यार देखना था JL DAV

लाइब्रेरी में ग्रुप में पीछे बैठ कर फ़ोन चलाना था JL DAV
सबके साथ मिलकर टॉयलेट को बंक रूम बनाना था JL DAV

भल्ला जी के कैंटीन पर लॉन्च में टूट जाना था JL DAV
और दोस्त चीज़ छीन ले तो उनसे रूठ जाना था JL DAV

नई प्रिंसिपल से बच्चो और टीचर्स में ख़ौफ़ आ जाना था JL DAV
उनके आने के बाद इतने अच्छे बदलाव को देखना था JL DAV

सोचा भी ना वो सब कुछ अब स्कूल में होते देखना था JL DAV
डूबती कश्ती को पंख लगते और आसमां को छूते देखना था JL DAV

न्यू बिल्डिंग और ओल्ड बिल्डिंग में भेद भाव करना था JL DAV
क्लास से ज्यादा तो हमेशा ग्राउंड में वक़्त बिताना था JL DAV

DAV मैगज़ीन से एक दुसरो को मारना और प्लेन बनाना था JL DAV
अरेंजमेंट पीरियड में टीचर्स को खूब परेशान करना था था JL DAV

रोजाना कांच और बोर्ड को तोड़ना था JL DAV
फाइन के नाम पर सबका चुप हो जाना था JL DAV

एनुअल फंक्शन में टीचर्स का बिजी हो जाना था JL DAV
और हम सब का पूरे स्कूल में आतंक मचाना था JL DAV

सिर्फ स्कूल नही यादों का समुंदर है JL DAV
आज भी हम सबके दिल के अंदर है JL DAV

हम सबका अभिमान है JL DAV
हम सबकी शान है JL DAV

नितीश कुमार
Nitish Kumar


This poem is in remembering of Jhabban Lal DAV Public School, Paschim Vihar, New Delhi usually known as JLDAV or JL DAV.

If you want any change/recommendation/sugggestion then contact to Nitish Kumar on Instagram @nitish.poetry or @hindi__poetry


A very special thanks to our new Principal Ma'am Mrs. Anupama Bindra for making such changes in our school and make us proud JL DAV'ian

Sunday, December 29, 2019

भूतिया मकान


Horror Story
Haunted House

भूत, प्रेत, साया, डायन आदि पर आप चाहे विश्वास करते हो या नहीं, लेकिन उनके अस्तित्व को आप पूरी तरह नकार भी नहीं सकते हैं। यह एक ऐसा विषय है जिस पर काफी बातचीत होती है लेकिन इसका सच केवल वही जानता है जो इसे महसूस करता है।

स्कूल में हमारा स्पोर्ट का पीरियड था। हम 6-7 बच्चों ने डिसाइड किया आज हम ग्राउंड में नही जायेगे। यहीं क्लास में बैठ के गप्पे मरेंगे। हम सब एक सर्किल बना कर क्लास में बैठ के अपनी बाते करने लगे। अचानक वहाँ बातो बातो में भूतों की बात होने लगी। अब जैसा हर जगह होता है कि 'भूत-प्रेत होते है या नही?' इस टॉपिक पर बहस होने लगी। कोई कहने लगा  होते है कोई कहता नही होते। इन्ही आवाजों के बीच एक धीरी सी सहमी हुई आवाज आती है "होते है! कोई मानो या नही, लेकीन होते है, मैंने देखा है!" चारो तरफ सन्नाटा पसर गया। यह आवाज थी एक मेरे क्लासमेट की। सबके मुँह से एक साथ निकला।
कब? कहाँ? कैसे? 

(अब कहानी उसके शब्दों में)

ये बात तब की है जब मै 13 साल का था। हम जिस पार्क में खेला करते थे उसके पीछे एक टूटा फूटा दो मंजिला मकान था। जो भूतिया मकान के नाम से जाना जाता था। कहते थे कि इस मकान में एक वेल सेटल्ड फैमिली रहती थी, पति पत्नी और उनका एक लड़का उम्र कुछ 11-12 साल होगी। अचानक एक बीमारी से उस लड़के की मौत हो गई थी। इस दुख का बोझ वो दोनों नही उठा पाए, और कुछ दिनों बाद उनकी भी मौत हो गई। उसके बाद काफी लोगो ने उस मकान में नकारात्मक शक्ति होने का दावा करने लगे।

हम एक दिन बरसात के दिनों में शाम को उस पार्क में खेल रहे थे। आसमान को पूरी तरह बदलो ने ढक रखा था। सुन सुन कर ठंडी हवाएं कानो को छू कर गुजर रही थी। खेलते खेलते हमारी बॉल उस मकान में चली गयी। अब क्या? सब कुछ ना कुछ बोलने लगे।
कौन जाएगा बॉल लेने?
जिसने मारी है वो लाएगा।
रहने देते है शाम हो गयी अब कौन जाएगा?
मै उस वक़्त थोड़ा हिम्मत वाला था, मैंने बोला सब साथ में चलते है।
पागल है क्या! अंधेरा सर पर है और तू भूतों से पंगा लेगा?
भूत-प्रेत कुछ नहीं होते।
होते है! मम्मी बताती है।
हाँ, नही जायेगे, चलो घर चले, वैसे ही डर लग रहा है।
सही बोल रहा है ये, साथ में चलते है। (मेरे एक दोस्त ने मेरा साथ दिया)
नही मै नही जाऊँगा। डर लग रहा है।
हाँ! इस घर में भूत है मै भी नही जाऊँगा।
(अचानक एक आवाज आती है पीछे से)
अरे! नही है इस घर में भूत, मै एक दिन गया था।
(कोई 11-12 उम्र का लड़का हमारी तरफ आते हुए बोलता है)
तुम कौन?
अरे! मै भी यही पास में रहता हूँ। मै एक दिन गया था इस घर मे। कुछ भी ऐसा वैसा नहीं था। चलो सब साथ मे चलते है।
तुम्हें तो कभी यहाँ हमने देखा नही।
मै भी तो यही खेलता हु पता नहीं क्यों नहीं देखा? चलो जल्दी चलते है फिर घर भी जाना है।
हां यार चलते है, फुर्र से जाकर बॉल ले आते है। (मैंने उसकी बात में हामी भरी)
(अब सब ने हिचकिचाहट में हाँ में अपना सर हिला दिया)

अब हम कितने भी हिम्मत वाले क्यों ना हो, लेकिन दिल मे थोड़ा डर तो रहता ही है। हम सब धीरे धीरे घर की और बढ़ने लगे, पैर लड़खड़ा रहे है, सर्द हवाएं छू कर गुजर रही है। सूरज छुपने को तैयार है। बारिश होने से पहले का वो मंजर नजर आ रहा है। अचानक बादल गरजता है।
मम्मी! (एक लड़का चिलाता है)
अरे! कुछ नही हुआ बारिश होने वाली है, जल्दी चलते है। (उस लड़के ने गुस्से में कहा)
उस घर का मै दरवाजा खोलता हूं, घर की और गहरी सांस लेते हुए हम आगे बढ़ते है। घर मे थोड़ा अंधेरा है। चारो और दीवारों पर मिट्टी की परत जमी है। हर तरफ मकड़ी के बड़े बड़े जाले है। जिसमे मकड़ियां खुद के ही जाल में फस कर तड़प रही है और मरने का इंतजार कर रही है। हम काँपते हुए आगे बढ़ रहे है। जैसे जैसे कदम आगे बढ़ रहे है दरवाजे से आ रही रोशनी कम होती जा रही है। घर का तापमान धीरे धीरे कम होता प्रतीत हो रहा है। सन्नाटा पसरा हुआ है। एक दूसरे की सांसे हमे सुनाई दे रही है। हम घर के काफी अंदर पहुंच गए है। हमारा शरीर ठंडा हो रहा है। अचानक किसी के रोने की आवाज आती है। गला हमारा भर गया। सांसे रुक गयी। सब चिलाते हुए भागने लगे। उन सब के पीछे मै भी जैसे ही दो कदम भागा किसी ने मेरा हाथ पकड़ लिया। गले से आवाज निकलना बंद हो गयी। रोंगटे खड़े हो गए। पैर ठंडे पढ़ गए। शरीर वही जम गया। सब घर से भाग गए है। अब अकेला सिर्फ मै इस घर मे! 
अरे! मै हूँ, डर क्यों रहे हो? देखो! बिल्ली रो रही है। (जो लड़का हमे बाहर मिला था उसने मुझे रोकने के लिए मेरा हाथ पकड़ा था।) 
भाई तुम भी चलो, सब भाग गए हम ही दोनों अकेले रह गए है। बहुत डर लग रहा है मुझे। (मैं डरते हुए उस लड़के को कहता हूं)
मै साथ मे हु ना! डरना क्या? बस बॉल ढूंढ लेते है। (ये बोलते ही वो आगे बढ़ता है, मेरे कदम भी नाजाने ना चाहते हुए भी उसके पीछे बढ़ने लगते है)
आगे मैं ये क्या देखता हूं? वहां एक पूजा का सिहांसन बना हुआ है। बीच मे यज्ञ की जगह जिसमे कुछ जली हुई लकड़ियों की राख है। उसके चारों तरफ़ बैठने की गद्दी है। लग रहा है कुछ दिन पहले ही वहां यज्ञ हुआ है। ये क्या? मुझे धुएं की खुशबू महसूस हो रही है। लग रहा है अभी अभी कोई यहां यज्ञ करने लगा। घर पूरा ठंडा हो गया है। चेहरे पे पसीना। वहां एक तस्वीर है जिसपे माला है। तस्वीर देखने के लिए मै आगे बढ़ता हूं। तस्वीर पलट कर देखता हूँ। सांसे रुक गयी। पीछे से कोई जोर जोर से हंसने लगा। मै दरवाजे की ओर भागा। दरवाजा बंद हो गया। मै ऊपर की सीढ़ियों की ओर दौड़ा। बादल फिर गरज रहे है। हसने की आवाज थमने का नाम ही नही ले रही। मै सीढ़ियों से टकरा कर नीचे गिरता हूं। उठा नही जा रहा लेकिन फिर भी पूरी ताकत लगा कर उठता हूं। जितनी ताकत है उतनी ताकत से ऊपर की ओर दौड़ रहा हूं। लग रहा है कोई छाया भी मुझे पकड़ने मेरे पीछे दौड़ रहा है। जैसे जैसे कदम बढ़ रहे है दिल की धड़कने और तेज होती जा रही है। ये क्या? ऊपर तो पूरा अंधेरा है, कहि कुछ भी नहीं दिख रहा। चिलाया भी नहीं जा रहा है।शरीर पूरा हल्का हो गया है। लग रहा है अब हिम्मत नहीं है कुछ भी करने की। मैं अब पूरी हिम्मत हार चुका हूं। एक छोटी सी रौशनी नजर आयी। यही रोशनी अब उम्मीद लेकर आयी है। मै खुशी से उस रौशनी की और बढ़ने लगा। ये रोशनी तो स्ट्रीट लाइट की है जो बालकनी के दरवाजे से आ रही है। मैं पूरी ताकत लगा कर दरवाजा खोलता हु। अब मै घर की बालकनी पर पहुच गया। बहार खड़े मेरे दोस्त चिला रहे है। 
क्या हुआ? 
क्या हुआ?
बहार आजा।
पागल है क्या तू? ऊपर क्या कर रहा है?
जल्दी नीचे आ।
चल अब घर चलते है।
बादल जोर जोर से गरज रहे है। सूरज डूब चुका है। रात हो चुकी है। चारो और अंधेरे के बीच स्ट्रीट लाइट के नीचे दोस्तो का डरा हुआ चेहरा। मुझपे बारिश की बूंदे पड़ने लगी। मेरे जुबान से शब्द बहार नही आ रहे। मै कुछ बोलना चाह रहा हूं, लेकिन लग रहा है मुझे कोई बोलने से रोक रहा है। अचानक मै बालकनी से नीचे गिर गया। धीरे धीरे आँखे बंद हो गयी और जब खुली तो मै हॉस्पिटल में था।

(अब खुद मेरे शब्दों में कहानी)

अब मेरे दोस्त की इस कहानी के बाद हमारे स्कूल के उस क्लास में हम 6-7 बच्चे बस एक दूसरे का चहरा देख रहे थे।
मैंने अपने उस दोस्त से धीरी आवाज में पूछा "जो लड़का तुझे बहार मिला था, उसका क्या हुआ?"
मेरे दोस्त ने सांसे भरते हुए पसीना पोछते हुए आंखों में आँखे डाल कर (उसकी आँखों में डर था) धीमी आवाज में कहा "वो तस्वीर उस लड़के की ही थी, और उसी ने मुझे बालकनी से धक्का दिया था।"

Nitish Kumar
नितीश कुमार


For more such type of horror stories in hindi, poems, love poems, motivational poems, poems on social issues (all poems in hindi), shayari, love shayari, Do regular visit to this blog.
nitishkealfaaz.blogspot.com

Thursday, August 15, 2019

15 August

Independence day shayari
तिरंगा

इस तिरंगे से ही है हमारी पहचान,
यही है हमारे देश का अभिमान।
मालूम है आज हम करेंगे इसका सम्मान,
मगर कल मत होने देना इसका अपमान।
कहीं पड़े दिखे तिरंगा तो उसे उठा लेना,
हो दिन कोई सा भी तुम रोजाना,
अपनी देश भक्ति दिखा देना।।

Nitish Kumar
नितीश कुमार

Wishes you all Very Happy Inpendence Day...
आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

Jai hind... Jai jawan... jai kishan... jai vigyan...
Vande Matram... Bharat mata ki jay...

मेरी सभी बहनो को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं।

रक्षाबंधन स्वन्त्रता दिवस के दिन आया है,
हमारी बहनो के लिए आज़ादी का संदेश लाया है।

For hindi poem, shayari, article in hindi must regular visit to this blog.
हिंदी कविता, शायरी, लेख पढ़ने के लिए रोजाना इस ब्लॉग पे आए।

Sunday, August 4, 2019

दोस्ती

Friendship day
Friendship

आज दोस्ती पर लिखना चाह है मैंने,
एक खूबसूरत रिश्ते को बयां करना चाह है मैंने।

खून का रिश्ता तो भगवान बनाते है,
जो रिश्ता हम बनाये वो दोस्त कहलाते है।
हर संकट की घड़ी में आपका साथ दे जाते है,
इसलिय तो ये खून के नही दिल के रिश्ते कहलाते है।।

ख़ुशियों में तो सब साथ देते है,
दुखों में जो शख्स साथ देता है।
ये दुनिया उसे दोस्त बुलाते है,
जो हरदम आपका साथ निभाते है।।

दोस्ती जिंदगी के अंधेरे में,
खुशियों की चमक लाती है।
हो कैसी भी परेशानी आपके घेरे में,
दोस्ती उसे भगा ले जाती है।।

जब कोई जिंदगी में है उलझा,
दोस्त ने ही तो है उसे समझा।
हर ग़म में आपका साथ दिया,
हर परेशानी को आपसे दूर किया।।

अगर घरवाले पेड़ो की छांव है,
तो दोस्ती उसमे शीतल हवाएं है।
हर परेशानी में घरवाले साथ देते है,
तो दोस्त भी कोनसा छोड़ के जाते है।।

नितीश कुमार
Nitish Kumar

आप सभी को मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
Wishes you all a very happy friendship day.

This is a poem on friendship in hindi for friendship day.

This poem is dedicated to all my friends specially
Ankit Yadav
Ayaan Alam
Harsh Singh
Satyam Dwivedi
Saba Karim
Suraj Singh
and all remaining ones.

For poem, shayari, status, articles and stories on love, motivational, social issue and so on follow this blog.

Saturday, June 22, 2019

शायरी

Attitude shayari


She: मौसम भी तो अक्सर बदल जाया करते है।

Me: मौसम की बात मत किया करो,
        वो बदलते है अपनी फितरत के लिए।
        कभी अपने दिल मे भी झाँक लिया करो,
        आप बदलते हो अपनी हसरत के लिए।।

For More Poem, love poem, motivational poem, shayari, love shayari follow this blog.

Sunday, June 9, 2019

Online Offline

Waiting-to-be-online
Online-Offline

ऑनलाइन ऑफलाइन का खेल बड़ा मजेदार है,
इसमे छुपा प्यारा सा इंतज़ार है।
दो दिल एक दूसरे के लिए बेकरार है,
एक बोले कब होंगे तेरे दीदार?
दूसरा बोले थोड़ी देर और रुक जा मेरे यार।।

Nitish Kumar
नीतीश कुमार

Dedicated to two love birds.