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Friday, December 31, 2021

2021 का मंजर

 

Covid 19
Covid-19 or Corona Virus (SARS-CoV-2)

2021 का मंजर!


साल बदलने को है, 
हाल बदलने को है।
बदलने को है ये कैलेंडर,
बदलने को है ये दिसंबर।।

मगर याद है वो सारा मंजर,
एक एक तस्वीर आज भी है हमारे अंदर।
अस्पताल के बाहर लगती वो कतारे,
धृतराष्ट्र बनी हमारी वो सरकारें।।

चीखता चिल्लाता हमारा देश,
ऑक्सीजन के लिए तड़पता स्वदेश।
मदद के लिए दिखते हज़ारो संदेश,
और हमारे नेताओं का बदलता वेश।।

ना जाने कितनो ने अपनो को खोया,
कितनो ने अपने सपनो को खोया।
खुशियों में हर दम जो नजर आया,
उन्हें ही जरूरत में खुद से दूर पाया।।

देखो हमारी किस्मत में कैसी सरकारे आयी,
जिन्होंने कहा ऑक्सीजन बिन किसी की मौत ना हुई।
ये कहते उन्हें तनिक भी लाज ना आयी,
ऑक्सीजन के लिए तड़पते देश की तस्वीर नजर ना आयी।।

पूण्य है वो लोग जिन्होंने ऐसे वक्त में इंसानियत दिखाई,
सोनू सूद - कुमार विश्वास जैसे कितनो ने कितनो की जान बचाई।
है नमन उन सभी को जिन्होंने भगवान का रूप बन देश को बचाया,
है नमन उन सभी परिवारों को जिन्होंने इस वर्ष अपनों को खोया।।

आओ करते है हम एक वादा,
फॉलो करेंगे कोरोना का हर एक कायदा,
ये मंजर फिर नही आने देंगे।
साथ मिल ओमिक्रोन को हरा देंगे।।

नितीश कुमार
Nitish Kumar

We’ve lost so many souls this year 2021. We praying that God give peace to all the departed souls. Our Condolences with the families who lost their lovable one.

Hope this new year is filled with health, love, prosperity and loads of fun! 

Happy New Year...


Warning: Below images may distract you.
चेतावनी: नीचे दी गयी तसवीरें आपको विचलित कर सकती है।

Covid-19 Corona Virus
Family members of a COVID-19 victim console each other during cremation in Jammu, India, April 25, 2021. 
Pic Credit: Channi Anand/AP

2nd wave India
People cremate the body of a COVID-19 victim at a crematorium ground in New Delhi, April 24, 2021.
Pic Credit: Danish Siddiqui/Reuters

Corona Virus in 2021
New bodies arrive at a mass cremation site in Delhi, April 23, 2021.
Pic Credit: Atul Loke/The New York Times/Redux Pictures

Oxygen Shortage in India
A man receives oxygen in a vehicle at a Sikh gurdwara (temple) in Delhi, April 25, 2021.
Pic Credit: Atul Loke/The New York Times/Redux Pictures

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Thank you


Nitish Kumar
(Nitish Ke Alfaaz)
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Thursday, November 19, 2020

छठ महा त्यौहार

Chhath Puja
Chhath Puja


उगते सूर्य की उपासना तो करे पूरा संसार,

डूबते सूर्य की उपासना करें सिर्फ बिहार।

ये है हमारे मिथिलांचल के संस्कार,

जिसके लिए हम रहते बेकरार।।

ये है हमारा छठ महा त्यौहार।।


डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर,

उगते सूर्य का करे इंतज़ार।

रात के घोर अंधकार में ही,

पहुच जाए घाट पर कर पूरा श्रृंगार।।

ये है हमारा छठ महा त्यौहार।।


वक़्त के साथ बदले है हर त्यौहार,

वक़्त ने बदले संस्कृति और संस्कार।

मगर छू ना पाया हमारा ये त्यौहार,

प्रकृति से ही है इसकी रौनक हर बार।।

ये है हमारा छठ महा त्यौहार।।


बर्षो से जो बेटे रहते बहार,

इस दिन मिलेंगे वो माँ के द्वार।

पूरे वर्ष कहीं भी रहे परिवार,

छठ पर्व पर एकत्रित होगा पूरा परिवार।।

ये है हमारा छठ महा त्यौहार।।


मिट्टी के चूल्हे हम बनाते,

शुद्धता का पूरा ध्यान है रखते।

गोबर से नीपते घर और द्वार,

हाथ से हाथ मिला काम करता पूरा परिवार।।

ये है हमारा छठ महा त्यौहार।।


छत पर गेहूं सुखाने से लेकर,

घाट तक दौरा उठाना नंगे पैर।

पोखर हो या हो नदियों की धार,

लगता हर वर्ष श्रद्धालुओं का अंबार।।

ये है हमारा छठ महा त्यौहार।।


Nitish Kumar

नितीश कुमार


जय छठी मैया🙏


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धन्यवाद


Tuesday, July 7, 2020

लॉकडाउन में प्रकृति की सुंदरता।

Beauty of nature in lockdown
River Yamuna in Delhi during Lockdown

इंसानो को जब से घरों में बैठाया है!


इंसानो को जब से घरों में बैठाया है,
तुम देखो तो कितना बदलाव आया है।

हर प्राणी देखो तो अब शुद्ध सांस ले पाया है,
कार्बन कम ऑक्सिजन को ज्यादा पाया है।
लॉकडाउन ने देखो तो प्रदूषण को घटाया है,
जहरीली हवाओ को अब हमने विलुप्त पाया है।।

परिंदों ने देखो अब खुला आसमां पाया है,
कितने सालो बाद हमने उन्हें चहकता पाया है।
लॉकडाउन हमारे लिए एक संदेश लाया है,
पर्यावरण का असली रूप हमारे सामने लाया है।।

इंसानो को जब से घरों में बैठाया है,
तुम देखो तो कितना बदलाव आया है।

नदियों में देखो कितना निर्मल पानी आया है,
कितने सालो बाद फिर गंगा में अमृत आया है।
लॉकडाउन ने बर्षो की समस्या को सुलझाया है,
गंगा जल को फिर से अब पीने लायक बनाया है।।

दिल्ली के आसमां में देखो तो दो इन्द्रधनुष नजर आया है,
गंदा नाला बानी यमुना में हमे फिर से जल नजर आया है।
लॉकडाउन में गाड़ी से भरी सड़को को हमने सुनसान पाया है,
उन सड़को पर अब हमने पक्षियों को बैठते और पानी पीते पाया है।।

इंसानो को जब से घरों में बैठाया है,
तुम देखो तो कितना बदलाव आया है।

चारों और देखो तो क्या खूब सन्नाटा छाया है,
प्रकृति की मधुर आवाजों को हमने कानों में पाया है।
लॉकडाउन ने हमे पर्यावरण से मिलवाया है,
सफेद आसमां अब नीला अंबर में बदल आया है।।

चांदनी रात में देखो तो फिर तारों का समुंदर नजर आया है,
बारिश की बूंदों में हमने फिर मिट्टी की खुशबू को पाया है।
लॉकडाउन पर्यावरण के लिए एक वरदान बन आया है,
पीढ़ियों बाद हमने फिर प्रकृति को जीवित होते पाया है।।

इंसानो को जब से घरों में बैठाया है,
तुम देखो तो कितना बदलाव आया है।

Nitish Kumar

नीतीश कुमार



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Wednesday, May 6, 2020

Love in Train

Love at first sight
Love at first sight

In a train, during my journey,
I saw a girl, sweet as honey.
I can't able to explain her beautiful smile,
I have never seen such a unique hairstyle.
That moment I have only one aim,
How I will ask her name?
Suddenly! That moment one miracle happen,
She questioned me " Can I ask you a Question"
I still have to pinch myself,
How it happened itself?
Now, I'm dreaming my whole life with her,
There is no one in my dream except her.
Suddenly! A clap broke that dream,
"Are you listening me?" She scream.
I nervously nodded my head,
"Now, I don't need any answer from you" she said.
All dreams that moment slipped like a sand,
I understand there is no one to hold my hand.

Nitish Kumar

Sunday, April 5, 2020

JL DAV की यादें


JL DAV की यादें


Jhabban Lal DAV Public School
Jhabban Lal DAV Public School

स्कूल नही जीवन का अटूट हिस्सा था JL DAV
कहानी नही जीवन का प्यारा क़िस्सा था JL DAV

टीचर्स के अनोखे नाम वाला प्यार था JL DAV
हमारे बचपन का पहला यार था JL DAV

जान बुझ कर देरी से स्कूल जाने का बहाना था JL DAV
फिर गार्ड और पीटी से बेवजह बहस करने का ठिकाना था JL DAV

असेंबली में ना जाकर क्लास में ही बैठना था JL DAV
फिर सविता मैम के आते ही छुप जाना था JL DAV

स्कूल शुरू होते ही पहला काम अर्रेंजमेंट देखना था JL DAV
नोटिस बोर्ड से पहले हंसा आंटी से अर्रेंजमेंट देखना था JL DAV

मैम के जाते ही क्लास के बाहर घूमने निकल जाना था JL DAV
कम्बोज मैम का नाम सुन कर ही वापिस क्लास में घुस जाना था JL DAV

नेहा मालिक मैम का अचानक से दिया टोन सुनना था JL DAV
और उनके सामने रोजाना खुद को मौन खड़ा करना  था JL DAV

नीनू मैम को अपनी सारी बाते बताना था JL DAV
उनके रूम में जाने का इंतज़ार था JL DAV

शिखा मैम के प्यारे फेस एक्सप्रेशन देखना था JL DAV
उनके सामने हमारा इंग्लिश बोलने का ओबसेशन दिखाना था JL DAV

विदुषी मैम के ट्रिक से फार्मूला याद करना था JL DAV
नीना भोला मैम के पीरियड में मैथ पढ़ना और लॉन्च करना था JL DAV

केमिस्ट्री लैब में बिना लैब कोट और बिना पढ़े जाना था JL DAV
फिर थोड़ी देर बाद संजय सर् का गुस्सा देखना था JL DAV

फिजिक्स लैब में फॉर्मेलिटी का प्रैक्टिकल करते रहना था JL DAV
बीच बीच मे कुलबीर सर् से मजेदार गप्पे मारना था JL DAV

ई जी रूम में गेम खेलना और मजे करना था JL DAV
पवन सर् से बेमतलब की सारी बाते करना था JL DAV

श्रुति मैम से पढ़ना कम बहस ज्यादा करना था JL DAV
सीमा सिंह मैम के क्लास में सबका मौजूद रहना था JL DAV

संगीता मैम के नोट्स को अंडरलाइन करना था JL DAV
आकांशा मैम के लम्बे नोट्स को याद करना था JL DAV

मंजू शर्मा मैम को देखते ही राधे राधे करना था JL DAV
गीता कपूर मैम से किलो पॉट होउर सुनना था JL DAV

सरिता मालिक मैम से कभी भी चाटा खा जाना था JL DAV
पंकज सर् के अजीब से पनिशमेंट को सहन करना था JL DAV

अनुपमा मैम का कभी गुस्सा कभी प्यार देखना था JL DAV
आरती जैन मैम का माँ वाला प्यार देखना था JL DAV

लाइब्रेरी में ग्रुप में पीछे बैठ कर फ़ोन चलाना था JL DAV
सबके साथ मिलकर टॉयलेट को बंक रूम बनाना था JL DAV

भल्ला जी के कैंटीन पर लॉन्च में टूट जाना था JL DAV
और दोस्त चीज़ छीन ले तो उनसे रूठ जाना था JL DAV

नई प्रिंसिपल से बच्चो और टीचर्स में ख़ौफ़ आ जाना था JL DAV
उनके आने के बाद इतने अच्छे बदलाव को देखना था JL DAV

सोचा भी ना वो सब कुछ अब स्कूल में होते देखना था JL DAV
डूबती कश्ती को पंख लगते और आसमां को छूते देखना था JL DAV

न्यू बिल्डिंग और ओल्ड बिल्डिंग में भेद भाव करना था JL DAV
क्लास से ज्यादा तो हमेशा ग्राउंड में वक़्त बिताना था JL DAV

DAV मैगज़ीन से एक दुसरो को मारना और प्लेन बनाना था JL DAV
अरेंजमेंट पीरियड में टीचर्स को खूब परेशान करना था था JL DAV

रोजाना कांच और बोर्ड को तोड़ना था JL DAV
फाइन के नाम पर सबका चुप हो जाना था JL DAV

एनुअल फंक्शन में टीचर्स का बिजी हो जाना था JL DAV
और हम सब का पूरे स्कूल में आतंक मचाना था JL DAV

सिर्फ स्कूल नही यादों का समुंदर है JL DAV
आज भी हम सबके दिल के अंदर है JL DAV

हम सबका अभिमान है JL DAV
हम सबकी शान है JL DAV

नितीश कुमार
Nitish Kumar


This poem is in remembering of Jhabban Lal DAV Public School, Paschim Vihar, New Delhi usually known as JLDAV or JL DAV.

If you want any change/recommendation/sugggestion then contact to Nitish Kumar on Instagram @nitish.poetry or @hindi__poetry


A very special thanks to our new Principal Ma'am Mrs. Anupama Bindra for making such changes in our school and make us proud JL DAV'ian

Sunday, August 4, 2019

दोस्ती

Friendship day
Friendship

आज दोस्ती पर लिखना चाह है मैंने,
एक खूबसूरत रिश्ते को बयां करना चाह है मैंने।

खून का रिश्ता तो भगवान बनाते है,
जो रिश्ता हम बनाये वो दोस्त कहलाते है।
हर संकट की घड़ी में आपका साथ दे जाते है,
इसलिय तो ये खून के नही दिल के रिश्ते कहलाते है।।

ख़ुशियों में तो सब साथ देते है,
दुखों में जो शख्स साथ देता है।
ये दुनिया उसे दोस्त बुलाते है,
जो हरदम आपका साथ निभाते है।।

दोस्ती जिंदगी के अंधेरे में,
खुशियों की चमक लाती है।
हो कैसी भी परेशानी आपके घेरे में,
दोस्ती उसे भगा ले जाती है।।

जब कोई जिंदगी में है उलझा,
दोस्त ने ही तो है उसे समझा।
हर ग़म में आपका साथ दिया,
हर परेशानी को आपसे दूर किया।।

अगर घरवाले पेड़ो की छांव है,
तो दोस्ती उसमे शीतल हवाएं है।
हर परेशानी में घरवाले साथ देते है,
तो दोस्त भी कोनसा छोड़ के जाते है।।

नितीश कुमार
Nitish Kumar

आप सभी को मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
Wishes you all a very happy friendship day.

This is a poem on friendship in hindi for friendship day.

This poem is dedicated to all my friends specially
Ankit Yadav
Ayaan Alam
Harsh Singh
Satyam Dwivedi
Saba Karim
Suraj Singh
and all remaining ones.

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Wednesday, May 29, 2019

वो भी क्या दिन थे

Sad girl poem
वो भी क्या दिन थे

वो भी क्या दिन थे जब हम साथ रह करते थे,
तेरी छोटी सी खुशी को भी हम बड़ी में कन्वर्ट किया करते थे।
वो भी क्या दिन थे जब हम साथ रह करते थे।।

साथ बैठना, साथ खाना और साथ रोया करते थे,
तेरी हर छोटी सी खुशी के लिए लड़ा करते थे।
तेरे साथ किसी और का होना बहुत चिड़ा करते थे,
वो भी क्या दिन थे जब हम साथ रह करते थे।।

ना अब वो तो वापस आएंगे ना ही तेरी वो बातें,
बस एक तेरी सारी मेमोरी के सहारे जिया करते थे।
तेरा होना बहुत मायने रखता था, 
जब तेरे को देख के जिया करते थे,
वो भी क्या दिन थे जब हम साथ रह करते थे।।

आज भी किसी और के साथ देखकर बुरा तो लगता है,
जब वक्त ही बदल गया तो फिर तेरे से बदलने का क्या उम्मीद किया करते थे।
वो भी क्या दिन थे जब हम साथ रह करते थे।।

तेरे साथ रहने के लिए विश मंगा करते थे,
जब दोस्त ही अपने नही रहे तो बाकियों से क्या उम्मीद किया करते थे।
तेरे साथ हर एक दिन नया सा लगता था,
पर यू नही सोचा था की एक दिन तू ही पूरा नया हो जाएगा।
वो भी क्या दिन थे जब हम साथ रह करते थे।।

Tuesday, May 14, 2019

मुझे पसंद है

Beautiful girl
मुझे पसंद है
उनका यूं आँखे झुका के चलना,
चेहरे पे अलग सी मुस्कान रखना,
हर दफा मुह में पेन को चबाना,
थोड़ी थोड़ी देर में झुलफो को पीछे करना,
मुझे पसंद है उनका ये सब करना।

छोटी छोटी बातों में बड़ी खुशियां ढूंढना,
चाहे कैसा भी हो गम मगर शांत रहना,
हर बात को बड़ा चढ़ा के बोलना,
खुद की जुबानी खुद की तारीफ करना,
मुझे पसंद है उनका ये सब करना।

तैयार होते ही पहली तस्वीर मुझे भेजना,
मुझे पसंद आए जब ही बाहर निकलना,
नही तो दोबारा एक और तस्वीर भेजना,
और मेरे एक हाँ का बेसब्री से इंतज़ार करना,
मुझे पसंद है उनका ये सब करना।

मुझे देख कर उनका यूँ शर्मा जाना,
शर्माते हुए अपना चश्मा ठीक करना,
अपनी नशीली आंखों में और नशा भरना,
चेहरे पे आई हुई घबराहट को छुपाना,
मुझे पसंद है उनका ये सब करना।

गुड़ मॉर्निंग से गुड़ नाईट तक विश करना,
सुबह से शाम तक कि हर दास्तां सुनाना।
छोटी से छोटी बात मुझे बताना,
खुशी हो या ग़म सब मे शामिल करना।।
मुझे पसंद है उनका ये सब करना।

छोटी छोटी बातो पे मुह बनाना,
लाखो दफा मनाने पे भी ना मानना,
लेकिन एक चॉक्लेट देखते ही सब भूल जाना,
फिर बच्चा बन उस चॉक्लेट को खाना,
मुझे पसंद है उनका ये सब करना।

मेरे बालो को बेवजह खराब करना,
फिर उसे अपनी पसंद का बनाना,
कपड़े को अपने हिसाब से ठीक करना,
यू नही इसे यू रखा करो ये बोलना,
मुझे पसंद है उनका ये सब करना।

शरारते कर के मुझे परेशान करना,
मेरे गुस्से करने पे मुझे ही सुनाना,
फिर मेरे रूठने पे अपना प्यार दिखाना,
थोड़ी ही देर में मेरे चेहरे पे मुस्कान ला देना,
मुझे पसंद है उनका ये सब करना।

नितीश कुमार
Nitish Kumar

Wednesday, May 1, 2019

मजदूर

Labour
मजदूर

जिनके हाथ हर दफा मिट्टी में रहते है,
सुबह से शाम वो बोझ उठाते रहते है।
सूरज से पहले वो घर से निकल जाते है,
चंद्रमा के साथ देर रात वो घर को आते है।।
वो और कोई नही हमारे देश के मजदूर होते है।

जो रोजाना सबको खुशियां देते है,
मगर खुद की खुशियों को कहि बेच देते है।
जो सबके जीवन मे तो रंग भर देते है,
मगर खुद के जीवन को बेरंग छोड़ देते है।।
वो और कोई नही हमारे देश के मजदूर होते है।

सब को तो वो घर बना के देते है,
मगर खुद फुटपाथ पे सोते है।
वो मेहनत तो दिन रात करते है,
मगर पैसे नाम भर का ही लेते है।।
वो और कोई नही हमारे देश के मजदूर होते है।

जिस दिन बिन काम रह जाते है,
उस दिन वो खा नही पाते है।
झूठी मुस्कान लिए सो जाते है,
मगर बेईमानी का वो नही खाते है।।
वो और कोई नही हमारे देश के मजदूर होते है।

जो खुद का इलाज नही करवा पाते है,
परिवार के लिए सारे ग़म सहन कर जाते है।
खुद के बच्चों को स्कूल नही भेज पाते है,
हर खुशियों से वो वंचित रह जाते है।।
वो और कोई नही हमारे देश के मजदूर होते है।

नितीश कुमार
Nitish Kumar

Monday, April 29, 2019

उसकी खूबसूरती

Her beauty
उसकी खूबसूरती

उनके बारे में भी आज लिखना चाह है मैंने,
खूबसूरत चांद को कागज़ में समेटना चाह है मैंने।
लेकिन समझ नही आ रहा क्या लिखूं,?
उनकी नशीली आंखों के बारे में लिखूं?
या फिर लिखूं उनके वो घुंगराले बाल?
या लिखूं घायल कर देने वाली उनकी चाल।
उनकी आंखों का काजल भी कितना इतराता होगा,
खुद को इस जहां में सबसे खुशनसीब पाता होगा।
उनकी आँखों को वो प्यारा चश्मा और नशीला बनाता है,
उन्हें देख वो चांद भी खुद को कमजोर पाता है।
उनके वो  प्यारे होठ और उसमें गुलाबी रंग,
उनके वो उलझे झुल्फे और उसका रेशम रंग।
छोटी सी चिंता में बच्चा बन पेन को मुंह चबाना,
चेहरे पे आए झुलफो को नादानी से पीछे करना।
यही छोटी छोटी अदायें तो हम जैसो को मार देती है,
रहे कहीं भी निगाये तो उन्ही की और मुड़ जाती है।
जिन खूबसूरती ने हमे पागल बनाया है,
देखो आज उन्हें यहां सजाया है।
अभी तो बहुत कुछ लिखना है,
लेकिन क्या करें? उन्हें दुनिया की नजरों से भी तो बचाना है।

नितीश कुमार
Nitish Kumar

Wednesday, April 17, 2019

लोगो को बदलते देखा है हमने

जिनके हाथ पकड़कर चलना सीखा,
जिनके कंधो पे चढ़कर दुनिया को देखा,
उन्हें ही घरों से धक्के मारकर,
निकालते देखा है हमने।
लोगो को बदलते देखा है हमने।।

चंद रुपयों के लिए अपनो से झगड़ते,
और गैरो से रिश्ते बनाते देखा है हमने।
मंदिर में लाखों का दान करते,
और फकीरो को गालियां देते देखा है हमने।।
लोगो को बदलते देखा है हमने।

जिस देश से सब कुछ लिया,
उस देश को ही लूटते देखा है हमने।
जिस भारत माँ ने नाम बनाया,
उनका ही अपमान करते देखा है हमने।।
लोगो को बदलते देखा है हमने।

जिन शिक्षको से शिक्षा का पाठ लिया,
उन्हें पैसो का पाठ पढ़ाते देखा है हमने।
जिन किताबो से विद्या को लिया,
उन किताबो को फेकते देखा है हमने।।
लोगो को बदलते देखा है हमने।

जिन संस्कृति से दुनिया में पहचान बनाई,
उन संस्कृति को ही खोते देखा है हमने।
जिन के उपकारों से मंजिल पायी,
उन्हें ही भूलते देखा है हमने।।
लोगों को बदलते देखा है हमने।

जिन के लिए कमाते है देर रात तक,
उनसे ही दो पल बात ना करते देखा है हमने।
लोगो को जन्म से मृत्यु तक,
कई रंग बदलते देखा है हमने।।
लोगो को बदलते देखा है हमने।

नितीश कुमार
Nitish Kumar

Friday, April 12, 2019

याद आती है


याद आती है हमारी पहली मुलाकात,
जब जागे थे हमारे प्यार भरे जज़्बात।

उस दिन अचानक आपका हमसे यू टकरा जाना,
दो पलो के लिए ही मगर आपका हमारे सामने आना,
वो हमारा हिचकिचाना और आपका हमे देख मुस्कुराना,
फिर वो हमारा शर्मा जाना और आपकी यादों में खो जाना,
क्या होता है प्यार हमने उसी हसीन पल में था जाना।

याद आती है हमारी दुसरी मुुलाकात,
जब हुई थी हमारी सहमी सी बात।

हमने घबराते हुए आपसे आपका नाम पूछ लिया,
आपने भी हमें शरमाते हुए अपना नाम बता दिया।
शरमाते घबराते समझ लिए थे एक दूसरे के जज़्बात,
बातो बातो में अपने हाथों में लिया था आपका हाथ,
और वही से शुरु हो गयी थी हमारे प्यार की पहली बात।।

याद आती है हमारी अगली मुलाकात,
मोहब्बत सी पूर्णिमा की वो रात।

आपने तो आँखें भी ना मिलाई थी,
हमे देख कर तो स्वप्न परियां भी शर्मायी थी,
जुगनुओं ने भी हमे देेख कर अपनी शरारतें दिखाई थी।
भूल कर भी नही भूल सकता मै वो हसीन रात,
क्योंकि वही से हुई थी हमारे पहले प्यार की शुरुआत।।

याद आंती है हमारी सारी मुलाकाते,
और प्यार भरी हमारी सारी बाते।

नितीश कुमार
Nitish kumar

Thursday, April 11, 2019

तुझे अपना नाम बनाना है


मत सुन क्या बोलती है ये दुनिया,
बस ढूंढ तू अपने अंदर की कमियां।
इन कमियों में तुझे सुधार लाना है,
एक दिन तुझे अपना नाम बनाना है।।

ये दुनिया तो चाँद में भी दाग निकाल लेती है,
और खुद के दाग को बेदाग कहा देती है।
तुझे इनके नजरियों को बदलना है,
एक दिन तुझे अपना नाम बनाना है।।

मत सोच क्या लिखा है तेरे मुकदर में,
बस ढूंढ तू हुनर अपने अंदर में।
तुझे उन हुनर को मजबूत बनाना है,
एक दिन तुझे अपना नाम बनाना है।।

तुझे अपना लक्ष्य तय करना है,
उस लक्ष्य पे निरंतर चलना है।
बिना रुके उस लक्ष्य को पाना है,
एक दिन तुझे अपना नाम बनाना है।।

तू तो आज सिर्फ एक कोयला है,
माना तू आपने घरवालों का लाड़ला है।
लेकिन सोना बनने के लिए खुद को आग में जलाना है,
एक दिन तुझे अपना नाम बनाना है।।

अभी तो तुझे खुद से लड़ना शुरू करना है,
खुद को खुद से रुबरु करना है।
अपने अंदर छुपी ताकत को जगाना है,
एक दिन तुझे अपना नाम बनाना है।।

आज से ही तुझे खुद में वदलाव लाना है,
निरंतर खड़ा हिमालय जैसा स्वाव लाना है।
खुद को इस दुनिया से अलग बनाना है,
एक दिन तुझे अपना नाम बनाना हैै।।

अभी से ही तुझे मोह माया हटाना है,
दुनिया की परवाह किये बिना लक्ष्य पाना है।
जिंदगी के सफर में हर मुसीबतों से लड़ना है,
एक दिन तुझे अपना नाम बनाना है।।

नितीश कुमार
Nitish Kumar

Saturday, April 6, 2019

चुनाव के दिन

election-days
देश में चुनाव के दिन नजदीक आ गए है,
हमारे छुपे नेता अपने घरों से बाहर आ गए है।
अब वो टीवी और अखबारों में छा गए है,
करने झूठे वादे अब वो हमारे बीच आ गए है।।

लोगो की परेशानियां भी नेताओ को नजर आने लग गई है,
गरीबों की फ़िक्र भी उन्हें सताने लग गई है।
देश की जनता भी नेताओ को अजमाने लग गई,
'अब क्यों आयी हमारी' याद उनसे पूछने लग गई है।।

गरीब के टूटे घर भी नेताओ की भीड़ आ गई है,
अब तो हर घरों में रोशनी की चमक आ गई है,
हर पानी के नलो में पानी की बोच्छार आ गई है,
अब तो नेताओ की नयी नयी योजनाएं आ गई है।

बच्चा, बूढ़ा, जवान सब के वो हाथ जोड़ रहा है,
देखो तो वो नेता रोजाना गरीबों के पैर छू रहा है।
कोई दिल्ली को विशेष राज्य बनाने का वादा कर रहा है,
तो कोई वर्तमान सरकार पर आरोप लगाया जा रहा है।।

कोई 72000 की योजना का लालच दे रहा है,
कोई मंदिर मस्जिद के चक्कर लगा रहा है।
कोई देश की जनता को चौकीदार बना रहा है,
यही तो लोकतंत्र का त्योहार देश में छा रहा है।।

कोई तो मां गंगा की बेटी भी बन रही है,
किसी को हराने के लिए दले आपस में मिल रही है।
दले एक दूसरे पर भाषणों का प्रहार कर रही है,
लेकिन हमारे देश की  जनता ये सब देख रही है।।

मेरे देश के लोग तो ये जानते है,
ये माहौल हर पांच वर्ष पे दिख जाते है।
ये नेता झूठे भाषण देते रहा जाते है,
जीतने के बाद वो अपने वादे भूल जाते है।।

देश की जनता भी है समझदार,
कौन है हम सब का सही उम्मीदवार,
कौन चलाएगा देश में सही सरकार,
वहीं जीतेगा यह लोकतंत्र का त्योहार।

नितीश कुमार
Nitish Kumar