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Monday, April 25, 2022

जीवन की सीढ़ी।

जीवन की सीढ़ी
जीवन की सीढ़ी

तुम यहाँ तक तुरंत या एक झटके में नहीं आये हो। याद करो तुमने कितनी कठिनाईया और कितनी मुश्किलों का सामना किया है, तब जाकर आज तुम यहाँ खड़े हो। कितनी मुश्किल से सीखा था पाँच लकीरों वाली कॉपी में 'अ' और A लिखना, और आज तुम Running में लिख रहे हो। कितनी मुश्किल से तुमने सीखा था अंको को और Fractions को जोड़ना, नाजाने कितने ही Word-Meaning याद किये होंगे, घूमते घूमते कविताए और पर्यायवाची को याद किया होगा। कितनी मुश्किल से याद की थी 17 की टेबल, लगाया था BODMAS, Componendo-Dividendo, कितनी तिकड़म से किये थे नाजाने कितने ही LHS = RHS, Area, Volume, Pythagoras जैसे अनगिनत सवाल।

अपने लड़कपन में, जब जवानी उफ़ान पर होती है, जब चंचलता चरम पर होती है, जब तुम्हे देना चाहिए था अपने प्यार को वक़्त तब तुमने अपना सब कुछ दिया HC Verma, Organic Chemistry, RD Sharma और Differentiation को। 

कितने ट्यूशन, कितनी क्लास, कितने टेस्ट दिए तुमने। 11वी 12वी के 100 चैप्टर एक बार में दिमाग में बिठाये तुमने, दिये इस देश के सबसे कठिन एग्जाम IIT, JEE, NEET, AIIMS, CAT.

जब कहा गया कि सफर यहीं तक था, उसके बाद भी दिये और और और एग्जाम। हर समय पर बार बार, तुमने अलग अलग जनसंख्या से प्रतिस्पर्धा की, रिश्तेदारों के तानों से प्रतिस्पर्धा की, खाली जेब से प्रतिस्पर्धा की, प्रेम से प्रतिस्पर्धा की। कितनी क्लास, कॉलेज, Exams, Viva, Marksheets, Cut offs से होते हुए तुम आज यहाँ तक पहुँचे हो।

कोई भी जब तुम्हें कहे कि तुम काबिल नहीं हो, ये सब याद करो, एक झटके में नहीं, तुम साल दर साल, एक एक सीढ़ी चढ़के यहाँ तक पहुँचे हों। और अगर तुम यहाँ तक पहुँचे हो, तो आगे कहीं भी पहुँच सकते हो। वक़्त तुम्हें सिर्फ आज के पड़ाव पर रोक सकता है, पर इससे नीचे नहीं गिरा सकता, वो तुम्हारी कांस्टेंट कमाई है। आज नहीं तो कल धीरे धीरे तुम कहीं भी पहुँच सकते हो।

कोई माई का लाल तुम्हें ये कह नहीं सकता कि तुम क्या हो? हमेशा हमेशा इस बात को याद रखना... कि तुम एक झटके में यहाँ तक नहीं पहुँचे हो।


नितीश कुमार
Nitish Kumar



  • कैसे आकाश में सूराख़ हो नहीं सकता,
       एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो ।

  • मेरे सीने में ना सही, तेरे सीने में सही,
       हो कही भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए ।

    -दुष्यंत कुमार

दुष्यंत कुमार
दुष्यंत कुमार


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Friday, April 8, 2022

युद्ध

Ukraine Vs Russia
Ukraine vs Russia

युद्ध जब समाप्त होगा और तुम विजय होगे। तुम इस जहां के सिकंदर बन चुके होगे। तब चारो ओर रणभूमि में बस लाशो का सेलाब होगा। तुम उन लाशो के ढेर पर खड़े होकर जश्न बनाओगे। मगर तुम्हारे जश्न में तुम्हारा साथ देने वाला कोई भी नही होगा। तुम देखोगे कि तुम कितने अकेले हो चुके हो। तुम तड़पोगे अपने जीत के किस्से सुनाने के लिए। तुम्हारे पास अब सब कुछ होगा मगर तुम्हारे जीत के किस्से सुनने के लिए एक जोड़ी कान भी तुम्हारे नसीब में नही रहेगा। क्योंकि ये लाशें तो ना ही सुन सकती और ना ही तुम्हारी जीत देख सकती है।


मैं चाहता हूं बंजर जमीन पर योद्ध लड़ा जाए। योद्धाओं के हाथ मे हथियार की जगह बीज और फावड़े दिए जाएं। इंसानो पर हथियार चलाने की जगह बंजर जमीन पर पूरी ताकत से फावड़ा चलाया जाए और बीज रोपा जाए। जो सबसे ज्यादा गुलाब उगयायेगा वो विजेता घोषित किया जाएगा। जीत किसी की भी हो ये दुनिया खुशबू सुंगेगी, लाशो की बदबू तो वैसे ही बहुत सुंग ली है। 


नितीश कुमार
Nitish Kumar


Russia Ukraine
After War

Russia Vs Ukraine war
Life After War



कौन शासन से कहेगा, कौन समझेगा
एक चिड़िया इन धमाकों से सिहरती है
-दुष्यंत कुमार


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Monday, March 29, 2021

रामायण से सीख

Ramayan
रामायण

 आज ही के दिन पिछले वर्ष लॉकडाउन में दूरदर्शन पर जनता की फरमाइस पर रामायण का प्रसारण शुरू हुआ था। पूरे देश में, देश के हर राज्य में, हर मोहल्ले में, हर गली में, कहीं कहीं तो विदेशो में भी लोगो ने बढ़ चढ़ कर इसे देखा, पूरे परिवार के साथ बैठ कर देखा। बल्कि देखा ही नही, इस पल को सबने मिलकर जिया। इस रामायण प्रसारण के जिस दिन रावण मरा था, लोगो ने उस दिन एक दूसरे को दशहरा की बधाई दी थी।  6 करोड टेलीविजन पर रामायण को एक साथ देखा जाता था। रामायण का हर एक सीन हर एक किरदार कुछ ना कुछ सीखाता है। 


Ramayan
भगवान श्री राम जी


उसमे दो सीन है जिसने मुझे सोचने पे मजबूर कर दिया था। पहला सीन जिसमे महाराज दशरथ जी बिस्तर पे लेटे हुए हैं, बुरी तरीक़े से रो रहे है, और सिसक सिसक के कह रहे होते हैं, राम........मेरा राम। वो अपने राम की याद में अधमरे से हो गए है। क्या आदमियों को ऐसे सबके सामने अपना दुःख दिखाने का हक़ होता है? मतलब मुझे शायद सालों हो गए रोये हुए, हाँ बीच में कभी बुरा लगा होगा। पर प्रॉब्लम पता है क्या है? ये बात कि मुझे बुरा लग रहा है। मैंने मोबाइल उठा के देखा होगा कि किसे फ़ोन मिलाएं, किसी को मिलाया भी होगा पर उससे ये नहीं कहा होगा कि यार मुझे बुरा लग रहा है। क्यों? क्योंकि शायद वो मुझे judge करेगा।


Ramayan
महाराज दशरथ जी भगवान श्री राम की याद में विलाप करते हुए


उस दिन श्री राम जी की माँ कौशल्या जी महाराज दशरथ जी से कहती हैं कि "मैं माँ हूँ, पर मैंने फिर भी धीरज नहीं छोड़ा, देखिएगा एक दिन हमारा राम वापस आएगा।" और शायद उस वक़्त को याद करके दशरथ जी फिर से बस इतना कह पाते हैं, राम.....मेरा राम। एक सूर्यवंशी सम्राट, महापराक्रमी योद्धा, असंख्य प्रजा जिनको भगवान् की तरह मानती थी वो इस दुःख में रो रहे थे कि उनका बेटा उन्हें छोड़ के चला गया। वजह चाहें जो भी हो, पर क्या उनका ऐसे रोना सही था या गलत? सवाल बस यही है।


Ramayan
महाराज दशरथ जी


एक बार ये सवाल खुद से पूछियेगा और जवाब ढूंढ़ियेगा। रोना सही है या गलत?


अब दूसरे सीन के बारे में बताता हूं। 


Ramayan
भगवान श्री राम जी


जब भगवान श्री राम जी को पता चलता है कि राजा दशरथ जी नहीं रहे तो वो भी सहन नही कर पाते है, और रोने लगते हैं। उनकी आँखों में मोती से आंशु, रामायण में सिर्फ इसी दृश्य में दिखते है, वो भी इतना मार्मिक। उनको रोते देख ऋषि वशिस्ट जी तब उनसे एक बहुत ही बड़ी बात बोलते हैं, ध्यान से पढ़ियेगा और समझियेगा, वो कहते हैं कि "ये मिलना बिछड़ना तो अनिवार्य होता है, बुद्धिमान इसका शोक नहीं करते हैं।" बहुत ही ज़बरदस्त लाइन है ये। एक ही लाइन में बहुत से सवालो के उत्तर है। शायद महान और आम लोगों की समझ के बीच बस इसी लाइन का फरक होता है। मतलब रामायण में भगवान श्री राम जी भी रोते हैं, लक्ष्मण जी भी रोते हैं। यहाँ तक की इंद्रजीत के मरने पर जिसे महाज्ञानी कहा जाता था, वो रावण भी रोता है। विभीषण के बिना शायद रावण को मार पाना कठिन था, मगर फिर भी रावण के मरने पर वो भी रोया था। शायद इसीलिए मेरे हिसाब से रोना गलत बात नहीं है, गलत बात है रोते रहना...!


Copyright Disclaimer:

  • All Images, which used in this Article are from the Doordarshan's Ramayan, Directed by Ramanand Sagar.
  • इस लेख में दिखने वाली तस्वीर दूरदर्शन की रामायण की है, जिसके निर्देशक रामानंद सागर जी है

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Wednesday, November 4, 2020

Baba Ka Dhaba

 

Baba Ka Dhaba

बचपन में सुदर्शन जी की एक कहानी पढ़ी थी "हार की जीत"। शायद आपने भी पढ़ी होगी। इसमें तीन पात्र होते है बाबा भारती, डाकू खड़ग सिंह और बाबा भारती का एक बहुत ताकतवर और सुंदर घोड़ा-'सुल्तान'। बाबा भारती को सुल्तान बहुत प्रिय होता है। एक दिन खड़ग सिंह बाबा भारती से मिलने उनकी कुटिया में आता है। बातों बातों  में अचानक उसकी नजर सुल्तान पर पड़ती है। एक नजर में खड़ग सिंह को सुलतान आकर्षित लग जाता है, सुल्तान था ही इतना प्यारा। उसने बाबा भारती से सुल्तान के बारे में पूछा। बाबा भारती ने भी बड़े गर्व के साथ अपने सुल्तान के गुणों को सुनाने लगे। जाते जाते खड़ग सिंह बाबा भारती से कहता है कि ये घोड़ा तो मैं लेकर ही रहूगा। बाबा भारती डर जाते है और घोड़े की निगरानी तेज कर देते है।


एक दिन बाबा भारती अपने सुल्तान के संग कहीं जा रहे थे। अचानक रास्ते में उन्हें एक दिव्यांग मिलता है। वो बाबा भारती से आगे के सफर के लिए मदद मांगता है। बाबा भारती एक संत आदमी मदद से पीछे कैसे हट जाते? वो तुरंत नीचे उतर कर दिव्यांग को उठा कर सुल्तान पे बैठा दिया। सुल्तान पे बैठते ही उसने सुल्तान की लगाम थामी और हवा की तरह सुल्तान को भगा ले गया। वो दिव्यांग और कोई नही डाकू सुल्तान सिंह ही था। बाबा भारती ने बहुत कोशिश की मगर वो खड़ग सिंह को नही रोक पाए। आखिर में बाबा भारती ने पीछे से उसे चिल्ला कर कहा "खड़ग सिंह इस घटना का जिक्र किसी से मत करना, नही तो लोग जरूरतमंद की मदद करना बंद कर देंगे।"


ये बात डाकू के दिल मे बैठ गयी। दिन रात बस यही शब्द उसके कानो में गूंजने लगें। आखिर में उतने सुल्तान को लौटाने का निर्णय लिया और रात के अंधेरे में सुल्तान को बाबा भारती के कुटिया के सामने बांद के चले गया। सुबह जब बाबा भारती ने सुल्तान को अपनी आँखों के सामने देखा तो खुशी के मारे वो फुट फुट लगे और सुल्तान को गले से लगा लिए। 


लेकिन, ये कहानी आज ही क्यों? शायद आप समझ गए होंगे। आज हम सबके सामने भी बिल्कुल यही कहानी है, बस पात्र अलग है। बाबा भारती के शब्दों ने खड़ग सिंह का ह्रदय परिभर्तन तो कर दिया मगर आज क्या?


एक यूटुबर को क्या जरूरत की कोई किस हालात में है। लेकीन उसने देखा कि एक बुजुर्ग बाबा का ढाबा चला रहा है और आर्थिक परेशानी से जूझ रहा है। बंदे ने एक वीडियो बनाई और लोगो से विनती कि की आप सब बाबा के ढाबे पे आकर भोजन कीजिए और इन दंपति की मदद कीजिए। रातों रात वीडियो वायरल होती है। अगले दिन बाबा का ढाबा के सामने हुजूम आ जाता है। एक रात में बाबा की जिंदगी बदल जाती है। अतः सब अच्छा होता है। लोगो ने इंसानियत देखी, किस्मत बदलते देखा। देश को एक नई रहा मिली, मदद की रहा, मतलब जब हो पाए लोगो की मदद करे। लेकिन अचानक एक खबर आती है कि उसी बाबा ने उसी यूटुबर पर केस कर दिया। कुछ फण्ड का मामला है। कुछ दिन पहले बाबा रो रहा था तब यूटूबर ने उसे नई जिंदगी दी, आज बाबा ने केस किया तो बन्दा रो रहा है। वक़्त बड़ी जल्दी बदल जाता है ना? खैर कौन सही है और कौन गलत वो तो पता चल ही जाएगा। लेकिन एक सवाल उठता है जो लोगो मे कुछ मदद की भावना आयी थी वो क्या रह पाएगी? क्या अब मदद करते वक़्त लोगो के दिल मे ये घटना नही आएगी? क्या अब कोई निडर होकर मदद कर पाएगा? सवाल तो बहुत है मग़र जवाब नही है! मैं बस इतना बोलूंगा अगर आप सही है तो एक दिन ये बात सबको पता चलेगी ही।


नीतीश कुमार

Nitish Kumar


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Disclaimer: This article is personal view of Nitish Kumar, from this we are not supporting and defaming any Person(s) in the case of Baba Ka Dhaba.

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Sunday, June 14, 2020

Sushant Singh Rajput

Sushant singh rajput
Sushant Singh Rajput

पता है, आपको बिल्कुल भी पता नही चलेगा कि कुछ लोग अंदर से कितने टूटे हुए होते है। अगर वो आपको आ कर बोलेगे न कि "मैं अंदर से टूटा हुआ हूं" तो आप यकीन नहीं करेंगे। उनका स्वभाव ही कुछ ऐसा होता है की सामने वाला यकीन ही नही कर सकता, कि इतने हँसमुख इंसान को भी कोई तकलीफ होगी। कोई बात उसे अंदर से दीमक की तरह खाई जा रही होगी। आपको हर समस्या में समझाने वाले इंसान को कभी कोई समझने वाला नही मिलता होगा। वो शायद आपको बोलते भी होंगे कि "यार मुझे ये परेशानी है", "मैं इसलिए परेशान हूं" आप हंस कर टाल देते होंगे कि सबको परेशानी से निकालने वाले को आखिर किस बात की परेशानी होगी? या आप सच भी मानते होंगे तो ये सोच कर कुछ नही करते होंगे कि "ये तो इतना समझदार है खुद को संभाल लेगा" लेकिन सच्चाई ये है कि उन्हें भी किसी के साथ की, किसी से खुल कर बात की जरूरत होती है।

कहते है जाने वाले को हम रोक नही सकते लेकिन इस परिस्थिति में हम जाने वाले को बिल्कुल रोक सकते है। बस आप अपने जानकारों से रोजाना बात करिए। उन्हें समझने की कोशिश करिए उनसे खुल कर पूछिए की "कोई तकलीफ तो नही?" फॉर्मेलिटी के लिए नही सच में दिल से पूछिए। अगर वो कोई बात शेयर करते है तो आराम से उसे समझे और फिर उसे समझाइए। आप नही समझा सकते तो किसी और को बोलिए लेकिन चुप बिल्कुल भी मत बैठिए। आपका एक चुप किसी को जिंदगी भर के लिए चुप करवा सकता है। सबसे जरूरी की आप कुछ भी करने और बोलने से पहले कई बार सोचे कि आपका एक कदम किसी के दिल को ठेस तो नही पहुचा देगा। आपके लिए वो बहुत छोटी बात होगी लेकिन सामने वाले के लिए वो बहुत बड़ी बात हो जाती है। शायद इतनी बड़ी की हमे फिर से वो देखने को मिल जाए जो आज मिला है। मैं हमेशा कहता हूं अपने आप को सामने वाले कि जगह रख कर देखो की उसने ऐसा क्यों किया या बोला अगर मैं उसकी जगह होता तो क्या करता या बोलता। जिस दिन आप खुद को सामने वाले कि जगह रखना सीख जाएंगे ना उस दिन आपकी आधी समस्या खुद हल हो जाएगी।

जरा सोच कर देखिए कि कितने अजीब हो गए हैं हम सब। हमारे बीच एक व्यक्ति मुश्किल में होता है। अंदर से बुरी तरह से टूट रहा होता है। ज़िंदगी से हार रहा होता है। खुद से निराश हो रहा होता है। मौत के करीब जा रहा होता है और हमारी संवेदना तब जागती है जब वो हमेशा के लिए हमें छोड़ कर चले जाता है। काश! मुश्किल में घिरे सुशांत सिंह जी को उनका कोई साथी हिम्मत देकर बचा पाता।

बिहार के पटना जैसे छोटे शहर से मुम्बई तक का सफर हर कोई पूरा नही कर पता। 2003 में DCE एंट्रेंस एग्जाम में AIR 7 लाना कितनी बड़ी बात है आप इससे समझ पाएंगे कि नॉन मेडिकल स्टूडेंट का इकलौता यही सपना होता है कि 10,000 रैंक भी आ जाए तो जिंदगी बन जाएगी। नेशन ओलिंपियाड फिजिक्स में टॉप करना, ये तो स्टूडेंट के सपने से भी बहुत दूर होता है। स्टूडेंट एक एग्जाम क्लियर करने की चाह रखते है इन्होंने 1 नही 2 नही पूरे 11 इंजीनियरिंग के एग्जाम क्लियर किए। अब आप सोच सकते है एक्टर के साथ साथ ये कितने अच्छे अच्छे स्टूडेंट भी थे।

आपके बहुत से डायलाग आज भी बहुतो को प्रेरणा देते है और देते रहेंगे!

मैं जब भी " M S Dhoni - The Untold Story " देखूंगा तो आपको अपने सामने जिंदा पाउगा। कुछ लोगो के काम इतने अच्छे होते है कि वो अमर रहा जाते है....

💐💐🌼🌼🌼🌼🌼💐💐
🙏🙏भावपूर्ण श्रदांजलि🙏🙏


We will miss you SUSHANT SINGH RAJPUT Sir


Sushant Singh Rajput rose to become a prominent actor due to his talent. A young actor, who excelled in his roles, gone too soon.. May the departed soul Rest in peace and God give strength to his family, friends & fans to bear this loss.

Note: We are not saying and supporting that Sushant Singh Rajput committed suicide, this article is based on initial report of June 14, 2021 from Media. Main purpose of this article is to increase awareness in our society.

धन्यवाद
Thank you

नितीश कुमार
Nitish Kumar

Sunday, May 31, 2020

कोरोना वायरस से कैसे बचें?


Covid 19
Covid-19

कल (1 जून 2020) से लॉकडॉन-5 (अनलॉक-1) शुरू हो रहा है। जिसमें लग भग सब कुछ खुल रहा है। इसका मतलब ये नही की अब आप घूमना फिरना शुरू कर दो। ये सब कुछ बस इसलिए खोला जा रहा है कि लोगो की आर्थिक स्थिति ठीक हो पाए। याद रहे कोरोना खत्म नही हुआ है, ये अब और तेजी से बढ़ रहा है। तो बस पैसे कमाने, काम करने और जरूरी चीज़ों के लिए ही घर से बाहर निकले। इसे मजाक में या हल्के में ना ले। आप अपनी जिंदगी अपने परिवार की जिन्दगी के लिए और देश के लिए घर पे ही रहे। वेवजह बिल्कुल भी घर से ना निकले। अगर कुछ महीने आप घर पर बैठ जाएंगे तो फिर से आप जिंदगी भर घूम सकते हैं मौज-मस्ती कर सकते हैं।

युवाओं के लिए एक जरुरी संदेश।

आपके पेरेंट्स अपनी जान जोखिम में डाल कर आप के लिए पैसे कमाने घर
से बाहर निकलेंगे तो आप वेवजह घर स बाहर निकल कर खुद की उनकी जान जोखिम में मत डाल देना।
जिन यार दोस्तो से आप मिलने जाओगे न, अगर भगवान ना करें आपको कोरोना हो गया ना तो उसके बाद वही यार दोस्त आपको नजर भी नही आएंगे।

कोरोना वायरस (कोविड - 19) से कैसे बचें?


जब भी आप जरूरी कामों के लिए घर बाहर जाए तो इन बातों को हमेशा ख्याल रखे और इसका पालन करें। ये आपको कोरोना वायरस (Covid-19) से बहुत हद तक कोरोना वायरस से बचा सकता है।

S - Social Distancing (समाजिक दूरी)

M - Mask (मास्क)

S - Sanitizer / Soap (सैनिटाइजर / साबुन)


Social Distancing (समाजिक दूरी)

जब भी आप घर से बाहर जाए तो सबसे जरूरी है कि सामाजिक दूरी का हर पल हर जगह हर क्षण खयाल रखें। हमेशा लोगो से कम से कम 6 फ़ीट (2 गज़) की दूरी बना कर रखे। किसी भी जगह किसी भी हालत में ये 2 गज की दूरी को कम नही होने देना है। किसी भी ऐसे व्यक्ति के सम्पर्क में ना आए जिन्हें कोरोना के लक्षण (जैसे बुखार और खांसी) है। 

Mask (मास्क)

मास्क को अब अपने शरीर का ही एक हिस्सा मानना है। हमेशा मास्क पहन कर रहे। बार बार मास्क को छुए नही। मास्क के रूप में आप खुद का कपड़े (3 लेयर वाला) वाला मास्क भी प्रयोग कर सकते है। कपड़ा या रुमाल को मास्क की जगह प्रयोग करते वक़्त आप इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखे कि जो हिस्सा आपने पहली बार कपड़े/रुमाल का बाहर की तरफ रखा था उसे हर बार बाहर की तरफ ही रखे। दूसरों के मास्क का प्रयोग ना करें। मास्क को रोजाना धो ले या बदल ले।

Sanitizer / Soap (सेनिटाइजर / साबुन)

दिन में बार बार सैनिटाइजर या साबुन से हाथ धोते रहे है। सेनिटाइजर का प्रयोग करते वक़्त आप सेनिटाइजर हाथ मे लेने के बाद सेनिटाइजर की बोतल को रख दे उसके बाद ही हाथ मे सेनिटाइजर लगाए, याद रहे सैनिटाइजर लगाने के बाद सैनिटाइजर की बोतल को आप न छुए या सेनिटाइजर की बोतल पर सेनिटाइजर लगा कर उसे भी डिसइन्फेक्ट(disinfect) करे। साबुन से बार बार 20 सेकंड तक हाथ धोए और हाथ धोते वक़्त अपने नल को भी साफ कर दे ताकि आपके नल पर कीटाणु ना रह जाए।

पानी की बोतल

घर से निकले से पहले अपने साथ अपनी पानी की बोतल में पानी लेना ना भूले। बहार कहि से भी पानी भरने से पहले देख ले वहां साफ सफाई होनी चाहिए। नल से पानी भरने से पहले नल को अच्छी तरह से धो लें। अपनी बोतल से किसी को पानी ना पीने दे, और ना ही दूसरों की बोतल से पानी पीयें।

चीज़ों को छूने से बचे

किसी भी अनावश्यक चीज़ों को जैसे बटन, दरवाजे, रेलिंग को न छुए। बटन और दरवाज़ों का प्रयोग करने के लिए अपने हाथ की कोनी का प्रयोग करे। 

मुह को ना छुए

किसी भी हालत में हमेशा याद रहे कि आपको अपने मुह के किसी भी हिस्से को कभी भी नही छूना है। अगर जरूरत पड़ती भी है तो छूने से पहले हाथ को साबुन या सेनिटाइजर से धो लें उसके बाद ही मुह को छुए।

सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें तो

यात्रा करने से पहले अपने हाथों को सैनिटाइज करें सुनिश्चित करें कि वाहन के ड्राइवर और स्टाफ सहित सभी यात्री मास्क पहनें हुए है। ध्यान दे कि शारीरिक दूरी बनी रहे (एक व्यक्ति पहर लाइन की हर ओर जिग-जैग तरीके में रहें) एसी को बंद रखें और ताजी हवा के लिए खिड़कियां खोल दें।

हमेशा यह याद रखें थूकें नहीं

थूक लगा कर पेज न पलटें, न नोट आदि गिनें। किसी के साथ भी खाना, पानी और बाकी समान शेयर ना करे। भीड़भाड़ वाले इलाके में जाने से बचें। हाथ न मिलाएं, नमस्ते करें। खांसते या छींकते वक्त कोहनी या टिश्यू पेपर का इस्तेमाल करें।

घर पर आने के बाद

घर में चप्पल या जूते पहन कर ना जाए। घर में घुसने से पहले अपने चप्पल जूतों को खोल ले और घर के बाहर ही रख दे, नही तो उसे घर के किसी ऐसी जगह रख दे जहां कोई आता जाता ना हो। अपने समान को डिसइन्फेक्ट करे और किसी अच्छी जगह रख दें। घर में आते ही सबसे पहले अपने हाथ पैर अच्छे से धो लें और नाहा लें। उसके बाद बाथरूम की बाकी चीज़ों को धो ले जैसे नल, दरवाजे का हैंडल। दोबारा से वही कपड़े ना पहने उन कपड़ो को अलग से धो कर अच्छे से धूप में सूखने दें।

कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए:

  • ऊपर बताए गए SMS का ध्यान रहे और दूसरों को भी बताए
  • बार-बार हाथ धोएं। हाथ धोने के लिए, साबुन और पानी या एल्कोहल वाला हैंड रब इस्तेमाल करें।
  • अगर कोई खांस या छींक रहा है, तो उससे उचित दूरी बनाए रखें।
  • अपनी आंखें, नाक या मुंह को न छुएं।
  • खांसने या छींकने पर अपनी नाक और मुंह को कोहनी या टिश्यू पेपर से ढक लें।
  • अगर आप ठीक नहीं महसूस कर रहे हैं, तो घर पर रहें।
  • अगर आपको बुखार, खांसी है, और सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर के पास जाएं. पहले ही कॉल कर लें।
  • स्थानीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के निर्देश मानें।